पंकज विश्वकर्मा (समाचार संपादक)
रायपुर : 16 फरवरी 1981 की बैठक के बाद तात्कालिक कलेक्टर अजीत जोगी का प्रशासनिक सेवा के लिए रायपुर से हस्तानांतरण हो जाता है। क्योंकि अजीत जोगी एक तेजतर्रार और बहुत ज्यादा पढ़े-लिखे होनहार आईएएस थे इसलिए ये गिरोह उनके ट्रांसफर के बाद अपने मंसूबों को सामने लाता है।
अचानक मई 1987 को बतौर ट्रस्ट के सचिव के रूप में महेंन्द्र अग्रवाल पंजीयक सार्वजनिक न्यास को एक पत्र भेजते हैं और बताते हैं कि 16 फरवरी 1981 से नारायण अग्रवाल, घनश्याम प्रसाद तिवारी, राधेश्याम अग्रवाल, शंभूदयाल शुक्ला, रामकिशोर पौराणिक और नरसिंह दास डागा सदस्य और पदाधिकारी है। 16 फरवरी 1981 की मिनट्स बुक जिसमें तात्कालिक कलेक्टर अजीत जोगी के हस्ताक्षर हैं उसमें बाकी नाम तो पर नरसिंह दास डागा का नाम नहीं था, मतलब इस नाम को बाद में जोड़ा गया।
उस मिनट्स बुक में कहीं भी महेंद्र अग्रवाल का नाम भी बतौर सचिव दर्ज नहीं है। स्पष्ट है कूटरचना कर इन नामों को जोड़ा गया। पत्र में महेंद्र अग्रवाल लिखते हैं कि 16 फरवरी 1981 के बाद उक्त कमेटी के कुछ सदस्यों का स्थान त्यागपत्र देने अथवा असामयिक निधन के कारण रिक्त हो जाने के कारण उनके स्थान पर नये सदस्य नियुक्त किए गए हैं। नरनारायण अग्रवाल,उपाध्यक्ष, महेंद्र अग्रवाल, सचिव, और बतौर सदस्य जीवेन्द्र नाथ ठाकुर, शंभूदयाल शुक्ला, सुशील कुमार सिंघानिया,नरसिंग दास डागा, राम किशोर अग्रवाल एवं सत्यनारायण शर्मा। पंरतु क्या इसे मिनट्स बुक में दर्ज कर बतौर प्रबंधक तात्कालिक कलेक्टर, रायपुर से स्वीकृत कराया गया था ?
अब आइए वर्ष 2023-24 में ट्रस्ट के स्वयंभू सचिव महेंद्र अग्रवाल पंजीयक, सार्वजनिक न्यास के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर सत्यनारायण शर्मा, सुरेश शुक्ला, राजे श्री महंत रामसुंदर दास, रमेश यदु, जगन्नाथ अग्रवाल, और सीताराम अग्रवाल का नाम ट्रस्ट में जोड़ने का आवेदन करते हैं। पंजीयक, सार्वजनिक न्यास 25 जून 2024 को ट्रस्ट में नये ट्रस्टी की नियुक्ति की दावा-आपत्ति का इश्तहार जारी करते हैं और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सहित कई थाना प्रभारी को इनके चरित्र सत्यापन के लिए पत्र प्रेषित करते हैं।
प्रकिया उपरांत अपने आदेश में लिखते हैं "प्रकरण में उभय पक्ष को सुनने के बाद यह निष्कर्ष निकला की जैतुसाव मठ में ट्रस्टी/न्यासी की नियुक्ति के संबंध में स्पष्ट प्रावधान नहीं है, तत्संबंध में आवदेक पक्ष द्वारा कोई ऐसी ड़ीड या नियमावली प्रस्तुत नहीं की गई जिससे स्पष्ट हो सकें कि प्रश्नाधीन ट्रस्ट में नये न्यासियों की नियुक्ति के संबंध में क्या प्रावधान दिया गया है। अतः प्रस्तुत आवेदन अपूर्ण होने से खारिज कर नस्तीबद्ध किया जाता है। आवेदक पक्ष द्वारा नियमानुसार आवेदन ट्रस्ट डीड के साथ प्रस्तुत करने पर नये न्यासी की नियुक्त करने की प्रक्रिया नियमानुसार की जायेंगी।"
जैतूसाव मठ में भंग ट्रस्ट के स्वयंभू ट्रस्टीयों ने बतौर तात्कालिक कलेक्टर अजीत जोगी को ठहराया दोषी - 1987 से ट्रस्ट पर क़ब्ज़े की कर रहे कोशिश...3