पंकज विश्वकर्मा(समाचार संपादक)
रायपुर. छत्तीसगढ़ में भारत माला प्रोजेक्ट के अंतर्गत रायपुर- विशाखापत्तनम इकोनॉमीक कारिडोर सड़क निर्माण में हुए भष्ट्राचार पर तथ्य परक और विश्लेषण कर पिछले चार अंकों में हमने इस घोटालों की हकीकत परत दर परत आपके सामने रखीं थीं। अगले अंकों में भी हम विस्तारपूर्वक छत्तीसगढ़ के भ्रष्ट राजनेताओं की हकीकत, राजनेताओं, व्यवसायीयों और अफसरों का गठजोड़ और राज्य की सबसे शक्तिशाली जांच एजेंसी का लेखा-जोखा प्रस्तुत कर रहे हैं।
सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यदि अपर कलेक्टर बी.सी. साहू के एक जांच प्रतिवेदन पर यदि कारोबारी हरमीत खनूजा, विजय जैन, केदार तिवारी और उनकी पत्नी उमा तिवारी की गिरफ्तारी ईओडब्ल्यू द्वारा की गई है तो राजस्व के बड़े अधिकारियों के अन्य तीन जांच प्रतिवेदनों में दर्ज साठ से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारी अब तक क्यों नहीं हो रही है ?
क्या ये पूरा मामला उच्च स्तर के राजनैतिक लड़ाई का है? जिसमें अभनपुर के दो बड़े नेता पूर्व जनपद अध्यक्ष खेमराज कोसलें और वर्तमान जिला पंचायत सदस्य अन्नू तारक को बचाने का प्रयास छत्तीसगढ़ के दो शक्तिशाली मंत्री और रायपुर जिले के 5 विधायकों द्वारा किया जा रहा है ? हाल ही संपन्न जिला पंचायत के अध्यक्ष के चुनाव में नवनिर्वाचित सदस्य अन्नू तारक ने भाजपा प्रवेश कर रायपुर जिला पंचायत में भाजपा का परचम लहराने में सबसे बड़ी भूमिका अदा की है। अन्नू तारक द्वारा भाजपा के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करने से ही रायपुर जिला पंचायत में भाजपा का कब्जा हो सका था। अगले अंकों में इसकी पूरी कहानी हम आप के सामने लायेंगे।
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अभी ईओडब्ल्यू द्वारा दर्ज एफआईआर के तथ्यों को आप के सामने रखते हैं। 11/09/23 के जांच प्रतिवेदन में तात्कालिक अपर कलेक्टर वीरेंद्र बहादुर पंचभाई और संयुक्त कलेक्टर निधि साहू ने पूरे मामले से जुड़े 50 से अधिक लोगों के नाम, खसरों की जानकारी और सरकार को हुई आर्थिक हानि को उजागर कर दिया था। ईओडब्ल्यू ने दर्ज एफआईआर में भी इस बात का उल्लेख है। ईओडब्ल्यू ने अपनी एफआईआर में लिखा भी है कि " तृतीय जांच प्रतिवेदन के अनुसार रायपुर विशाखापट्टनम इकोनामिक कॉरिडोर सड़क निर्माण के लिए भारत का राजपत्र सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय नई दिल्ली द्वारा जारी अधिसूचना दिनांक 30/1/ 2020 के पश्चात सड़क निर्माण में प्रभावित निजी भूमि के मूल खसरा नंबर एवं रकबा को टुकड़ा-टुकड़ा उपखंडों में विभाजित कर मुआवजा राशि के निर्धारण में अर्जन की जाने वाली निजी भूमि के बदले प्रभावितों को गलत ढंग से अधिक मुआवजा राशि देकर शासन को आर्थिक क्षति पहुंचाने वाले जिम्मेदार एवं सक्षम प्राधिकारी /भू अर्जन अधिकारी/ अनुविभागीय अधिकारी( राजस्व) अभनपुर निर्भय साहू तत्कालीन तहसीलदार शशिकांत कुर्रे तथा राजस्व निरीक्षक व हल्का पटवारी द्वारा क्षेत्र के भू माफिया, उपपंजीयक रजिस्ट्री अभनपुर /रायपुर से सांठगांठ कर दस्तावेजों में हेर फेर कर शासकीय भूमि को निजी भूमि में तब्दील कर बेईमानी की नीयत से छल पूर्वक उसे उपखंड में विभाजित कर भरी अनियमित व गड़बड़ी की गई। इस षड्यंत्र में कुल 60 खसरों को शामिल करते हुए मुआवजा राशि 18.40 करोड़ दर्शायी गई जबकि वास्तविक पात्रता मात्रा 3.5 करोड़ थी। इस प्रकार शासन को कुल 15.36 करोड रुपए की आर्थिक क्षति हुई है। "इसके साथ उन्होंने संपूर्ण विवरण भी दर्ज किया है।
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सबसे यक्ष प्रश्न यही है कि सारी जानकारी और राजस्व के बड़े अधिकारियों के जांच प्रतिवेदन, जांच में आये सभी नाम,की गई गड़बड़ी सहित पूरी राशि की भी जानकारी है तो फिर भी ईओडब्ल्यू अपनी जांच में प्रगति और सही दिशा क्यों नहीं दे पा रही है ? मतलब साफ है की गई गिरफ्तारी राजनीति से प्रेरित है और आगे की जांच ठंडे बस्ते में है? अभी तो हमारी पड़ताल और हमने सिर्फ अभनपुर क्षेत्र में हुई कुछ ही गड़बड़ी और आर्थिक अपराध को आपके सामने प्रस्तुत किया गया है इस कारिडोर में छत्तीसगढ़ के अन्य जिलों के मामले बाकी है।
भारत माला प्रोजेक्ट घोटालों पर इनसाइड स्टोरी और एक एक्सक्लूसिव रिपोर्ट - 6 ( संपूर्ण दस्तावेज़ी साक्ष्यों, साक्षात्कार और ग्राउंड रिपोर्ट पर आधारित)